Kahani in Hindi - अनसुलझे सफर का सत्य !! Blog by Manu || #hindify.xyz - Hindi Kahani - मनु की कहानियां !!

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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

Kahani in Hindi - अनसुलझे सफर का सत्य !! Blog by Manu || #hindify.xyz


Hindi Kahani- अनसुलझे सफर का सत्य !!

हम 4 दोस्त थे, मैं यानी मनुवान्याकायरा और नीकाक्ष

हम सबने एक दुसरे को छोटे नाम दिए हुए थे।

जैसे, मन, वन, की और निक। हमारी दोस्ती पूरे कॉलेज में बहुत मशहूर थी।

जहां भी जाना हो हम हमेशा साथ ही होते थे।

शायद ही कभी हम अलग-अलग किसी को नजर आये हो। कॉलेज में सब हमे 'फैंटास्टिक 4'  कहा करते थे।


Kahani in Hindi - अनसुलझे सफर का सत्य !! Blog by Manu || #hindify.xyz

हमारा एक ही काम था, खूब घूमना और नई नई जगह पर जाना।

मेरे और निक के पास बाइक हुआ करती थी और हम चारों दोस्त उसी पर पूरी दिल्ली नाप देते थे।

और हमारा एक और काम था, जो भी नई फिल्म रिलीज होती, वो हम ज़रूर देखने जाते।

हम बहुत अच्छे दोस्त थे। लेकिन एक बात पे अक्सर हम झगड़ा करते थे।

क्या इस जिंदगी के बाद भी कोई जिंदगी होती है या नही।



Hindi Kahani- अनसुलझे सफर का सत्य !!

बस ये ही एक विषय था जिस पर हम एकमत नही थे।

अब कॉलेज का वो दिन भी आ गया जब हमे अपने अलग-अलग रास्तों पर

आगे बढ़ना था, यानी कॉलेज का आखरी दिन।

हमने इसे ऐसा मनाने की सोची की ये दिन हमे हमेशा याद रहे।

हमने एक ट्रिप प्लान करी पहाड़ों पर जाने की। सभी राज़ी थे।

हमारे साथ दूसरी कक्षा की एक और दोस्तों की टोली भी चलने वाली थी।

निक ने कार का इंतेजाम भी कर लिया था और हम चारों उसी में घूमने निकलने वाले थे।

जैसा सोचा गया था, वैसा ही हुआ। हमारे साथ एक और कार में दूसरा समूह भी चल दिया।

बहुत मस्ती कर रहे थे सब। रास्ते में ढाबे पर हमने खूब खाया और बहुत सारी तस्वीरें भी खींची।

सब यही बात कर रहे थे की अब जाने दुबारा कब ये समय मिले।

बातें करते करते हम अपनी मंज़िल के करीब पहुंच रहे थे। अचानक निक ने

ज़ोर से कार का हॉर्न बजाया और चिल्लाया, "अरे हटो...!! आगे से..!!"

और उसने कार का पुरा स्टीयरिंग दाएं तरफ मोड़ दिया।

हमारी कार एक गहरी खाई में जा गिरी। इसके बाद मुझे कुछ भी याद नही रहा।

किसने हमे वहां से निकाला। क्या हुआ?  कुछ भी नही।



Hindi Kahani- अनसुलझे सफर का सत्य !!

मेरी आंख अस्पताल में खुली। वहां बेहद सन्नाटा था। सिर्फ वहां लगी मशीन की आवाज़ आ रही थी।

मेरे चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। जाने कब से मैं इस अवस्था में यहाँ लेटा हुआ था।

कितने दिन बीत गये होंगे। मेरे दोस्तों के साथ क्या हुआ। वो कहां हैं सब। 
यही सवाल मेरे दिमाग में उठ रहे थे।

फिर वो सारा दृश्य मेरी आँखों के सामने आ गया। जब निक जोर से चिल्लाया था। 

मुझे अच्छे से याद था, सामने कुछ भी नही था, फिर उसने कार का हॉर्न क्यों बजाया और

किसे बचाने की कोशिश कर रहा था वो। मुझे कुछ समझ नही आ रहा था।

इतने में डॉक्टर साहब अंदर आये और कहा, "उठ गये आप, कैसा लग रहा है अब आपको ?

पूरे 3 दिनों बाद आप जागें है। मैंने कहा, ठीक महसूस कर रहा हूँ।

डॉक्टर ने कहा, "आप लकी हो, ज़्यादा चोट नही आयी है आपको, आप जल्दी ठीक हो जायेंगे "।

मैंने बाकी दोस्तों के बारे में पूछा तो उन्होने बताया की बाकी सबको दुसरे अस्पताल में ले जाया गया था,

और वो भी अब ठीक हैं। अब जाके मेरी जान में जान आयी।


Hindi Kahani- अनसुलझे सफर का सत्य !!

मैं अपने सभी दोस्तों को बहुत मिस कर रहा था। मुझे जल्दी ही घर भेज दिया गया।

मैं पूरे रास्ते अपने दोस्तों से बात करने की ज़िद करता रहा, लेकिन डॉक्टर ने सख्त हिदायत दी थी की

अभी सिर्फ आराम ही करना है, और कुछ नहीं। इसलिये मुझे मेरा मोबाइल फोन भी नही दिया गया था।

खैर मैंने सोचा कुछ दिन बाद सीधा उनके घर जाकर ही उनसे मिल लुंगा।

मैं अपने घर आ गया। बहोत तेज़ी से मेरे स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था।

मात्र 4 दिन में ही मैं पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा था।

मैंने अगले दिन अपने दोस्तों से मिलने की ठानी। सोचा सीधा सरप्राइज दूंगा।

तभी मेरे घर की घंटी बजी और मैंने अपने तीनों दोस्तों को सामने खड़ा पाया।

मारे खुशी के मैं उछल पड़ा। हम सभी ने एक दुसरे को बहुत ज़ोर से गले लगाया

और कुछ देर ऐसे ही रहे। फिर मैंने सबको अंदर आने को कहा।



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वान्या, कायरा और नीकाक्ष, तीनों एकदम स्वस्थ लग रहे थे बिलकुल पहले जैसे।

निक ने कहा, " कैसा  ̈रहा सरप्राइज "? मैंने कहा, "अरे मैं सोच रहा था तुम्हें

सरप्राइज करने की और तुमने तो मुझे ही सरप्राइज कर दीया यार "।

वान्या ने कहा, " आ गये ना हम इतना सब होने के बाद भी " 

कायरा ने हस्ते हुए कहा, " मनु कैसा लग रहा है आपको जिंदा बचकर ?"

और सभी हंस दीये। मैं बेहद खुश था। मैंने कहा "तुम तीनों बैठो।

आज की पार्टी मेरी तरफ से"। इतना बोलकर मैं रसोई में चला गया। कुछ खाने पीने का बंदोबस्त करने।

जैसे ही मैं आया, तो पाया, की कोई भी वहां नही था।

मैंने कहा, " यार अब ये लुक्का-छुप्पी मत खेलो और आ जाओ सब बाहर।

लेकिन कोई भी ना आया। अब मुझे बहुत बुरा लगा, सब बिना बताये ही चले गए।

मैंने मम्मी को आवाज़ देकर बुलाया और कहा, " मैं अभी आता हूँ "।

उन्होंने मुझे रोका लेकिन मैं अब ना रुका।

मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा निक के घर जा पहुंचा। सीधा घंटी बजाई तो उसके पापा ने दरवाजा खोला।



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वो मुझे देखकर बेहद खुश हुए और अंदर आने को कहा। मैंने बोला, "अंकल जी, निक को बुला दीजिये।

वो अभी मेरे घर आया था और बिना बताये ही वापस आ गया।

हम बात भी नहीं कर पाए ठीक से"। ये सुनकर उसके पापा जी ने अपना

चश्मा उतारते हुए कहा, "क्या बोल रहे हो बेटा। वो तो आ ही नही सकता"।

मैंने कहा, "अभी तो आया था वो अंकल जी "। उन्होंने अपनी आखों पे हाथ रखते हुए कहा,

"उस एक्सीडेंट में सिर्फ तुम ही बच पाए थे बेटा, और कोई भी बच नहीं पाया"। 

मुझे लगा जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूं। ये नही हो सकता।

अभी तो मिला था मैं अपने दोस्तों से।

लेकिन अंकल जी आँखों से बहते आंसु उनके शब्दों का साथ दे रहे थे।

लेकिन डॉक्टर ने भी मुझे कहा था की उनका इलाज दूसरे अस्पताल में चल रहा है। 

शायद सब मुझसे ये बात छुपाना चाहते थे, ताकि मुझे कोई सदमा न लग जाये।

शायद इसीलिए मेरा मोबाइल फ़ोन भी मुझे नहीं दिया होगा। 

अब मुझे समझ आया, की वो हमारे बीच अक्सर होने वाली बहस का सबूत देने आये थे,

कि मरने के बाद भी एक दुनिया होती है।

और शायद ये हमारी दोस्ती थी जो उन्हें मेरे घर तक खींच लायी थी।

मैं आज भी उन्हें बहुत याद करता हूँ।




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